महाशिवरात्रि में मिलती है पूर्ण विकसित करने वाली ऊर्जा

भारतीय संस्कृति में, एक समय ऐसा भी था, जब वर्ष का प्रत्येक दिन एक उत्सव के रूप में मनाया जाता था. साल भर में 365 उत्सव होते थे, दूसरे शब्दों में कहें तो लोग साल के हर दिन को उत्सव के रूप में देखते थे. कुछ उत्सव पूरी तरह सांस्कृतिक होते थे, तो कुछ पुराने राजाओं के विजय दिवस होते थे, कुछ फसल काटने के लिए होते थे और कुछ चरवाहे प्रकृति से जुड़े थे, लेकिन महाशिवरात्रि पूरी तरह से एक आध्यात्मिक उत्सव था. 

जिसे आप ‘मैं’ कहते हैं, वह बस एक खास मात्रा में समय और ऊर्जा का संयोग है. समय एक ऐसा अवयव है जिसे आप न तो धीमा कर सकते हैं, और न ही उसे तेज भगा सकते हैं. यह अपनी ही गति से निरंतर चलता रहता है, किन्तु ऊर्जा के साथ आप बहुत से प्रयोग कर सकते हैं. आप ऊर्जा की एक उन्नत अवस्था में हो सकते हैं या आप ऊर्जा की एक क्षीण अवस्था में हो सकते हैं. आप क्या हैं और इस दुनिया में आपकी मौजूदगी कितनी है, यह मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी ऊर्जाएं कितनी तीव्र और उन्नत हैं.
 
दुनिया में कहीं भी, आध्यात्मिकता के सभी रूप मुख्यतः मानव ऊर्जा को उन्नत संभावनाओं के लिए ऊंचा उठाने की दिशा में प्रयास हैं. कुछ पद्धतियों में, वे इसको सचेतन रूप में संभालते हुए हो सकते हैं जबकि कई दूसरी पद्धतियों में, वे इसे अचेतन तौर पर संभालते हैं. जो लोग उससे कुछ अधिक होने की आकांक्षा रखते हैं, जो वे अभी तक हैं, उन सबके लिए शिवरात्रियों का एक विशेष महत्व होता है.
 
चंद्र केलेंडर के हर महीने की चौदहवीं रात को, अर्थात अमावस्या से पहले की रात को शिवरात्रि कहा जाता है. इस रात को, आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले लोग आम तौर पर विशेष महत्व की साधना करते हैं. साल भर में आने वाली बारह या तेरह शिवरात्रियों में से जो फरवरी-मार्च में, चंद्र केलेंडर के माघ महीने में आती है, उसे महाशिवरात्रि कहा जाता हैं, क्योंकि सभी शिवरात्रियों में यह सबसे अधिक शक्तिशाली होती है. 

महाशिवरात्रि को धरती के उत्तरी गोलार्ध की स्थिति कुछ ऐसी होती है कि वहां से व्यक्ति में ऊर्जा का एक स्वाभाविक उफान आता है. इस दिन प्रकृति मनुष्य को उसके आध्यात्मिक शिखर की ओर धकेलती है. इस परंपरा में, इस रात का लाभ उठाने के लिए हमने एक उत्सव स्थापित किया जो रात भर चलता है. इस रात भर चलने वाले उत्सव का एक लक्ष्य यह है कि आप जागे रहें. ऊर्जा के इस स्वाभाविक उफान को अपने मार्ग पर बढ़ने देने के लिए, आपको अपनी रीढ़ सीधी खड़ी रखनी होती है. 

इस धरती पर जीवन के विकास के दौर में, एक महत्वपूर्ण चरण बिना रीढ़ वाले जीवों से रीढ़ वाले जीवों के विकास की ओर था. मस्तिष्क के विकास में एक दूसरा चरण, रीढ़ का लेटी स्थिति से खड़ी स्थिति में आना था. मनुष्य के रूप में, हम एकमात्र ऐसी प्रजाति हैं जो एक खड़ी रीढ़ के स्तर पर आए हैं और शिवरात्रि के इस दिन, जब ग्रहों की स्थितियां कुछ ऐसी होती हैं कि ऊर्जा का स्वाभाविक उफान उठता है, तो रीढ़ को सीधी खड़ी रखने के अद्भुत लाभ होते हैं - न केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए, बल्कि उनके लिए भी जो सांसारिक जीवन में सफलता खोज रहे हैं. 

महाशिवरात्रि की रात को जब ये ऊर्जाएं ऊपर उठने की कोशिश कर रही हों, अगर आप लेटे रहते हैं तो आप उसमें एक व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं. आप न केवल उसके लाभ को खो देते हैं बल्कि आप खुद को एक बहुत सूक्ष्म तरीके से हानि भी पहुंचा सकते हैं. हालांकि ये सब चीजें आपके लिए केवल तभी अहमियत रखती हैं जब आप एक पूर्ण विकसित मनुष्य होना चाहते हैं. एक पूर्ण विकसित मनुष्य होने का अर्थ है कि आप खुद से जुड़े प्रत्येक पहलू को खोलना चाहते हैं जो कि खोले जा सकते हैं. इसी लक्ष्य के लिए, जागरण की प्रथा बनाई गयी है - जिसका अर्थ है सतर्क रहना और रीढ़ को सीधी रखना. 

लोगों को महाशिवरात्रि के दिन का महत्व और इस दिन रीढ़ को सीधा रखना कितना जरूरी है, यह बताने के लिए कई कहानियां हैं. कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की कुछ जगहों में, जब घर की छतें टाइल की होती थीं, तो बच्चों को महाशिवरात्रि की रात लोगों के घरों पर पत्थर फेंकने के लिए कहा जाता था. उससे टाइल की छत वाले घरों में इतनी जोर से आवाज होती थी कि लोग जाग जाते थे और आपको कोसते थे, लेकिन उससे फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि कम से कम घर में सोये उठकर बैठ जाते थे. अगर आप उन्हें बैठा देते थे, तो उसी को एक बड़ी सेवा माना जाता था. 

तो, शिवरात्रि की रात को जब उफान मौजूद हो, जब एक बड़ी लहर उपस्थित हो, ऐसे में अगर आप जानते हैं कि लहर की सवारी कैसे करें, तो यह काफी  आनंददायक होगा. अगर आप नहीं जानते है कि लहर की सवारी कैसे करें, तो आप उसी लहर से कुचले भी जा सकते है. एक माहिर लहर सवार का सपना सुनामी की सवारी करना होता है. लेकिन सुनामी ज्यादातर लोगों के मन में भय पैदा कर देती है. इसी तरह महाशिवरात्रि पर, आपके अंदर एक छोटी सी सुनामी आती है. अतः अपनी खुशहाली के लिए इसकी सवारी करें और महाशिवरात्रि की यह दिव्य रात बस जागे रहने की रात न होकर उल्लासमय जागृति की रात बन जाए.

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