शिव की आधी परिक्रमा क्यों की जाती है

शिव की आधी परिक्रमा क्यों की जाती है

शिव मंदिरों में शिवलिंग की आधी परिक्रमा की जाती है।

अगर आप किसी शिव मंदिर गये होंगे, तो आपने देखा होगा कि मंदिर के बीचो बीच शिव लिंग रहता है और ठीक उसके ऊपर एक पात्र होता है, जिससे दूध आदि द्रव्य से अभिषेक किया जाता है। शिवलिंग से एक इन द्रव्यों के बाहर निकलने के लिए एक नालीनुमा रास्ता होता है, जिसे “गौमुखी” कहते हैं। जिससे अभिषेक का द्रव्य बाहर निकलता रहता है।

इस अभिषेक द्रव्य को बहुत पवित्र माना जाता है और इसी कारण भक्त इसे कभी पार नहीं करते हैं। परिक्रमा करते समय  शिवलिंग की क्लोकवाइज और एंटीक्लोकवाइज दोनों तरफ से परिक्रमा पूर्ण की जाती है।

शिव पुराण के अनुसार, शिव आदि और अंत दोनों हैं और उनसे प्रवाहित होने वाली शक्ति और ऊर्जा अनंत है। गौमुखी / निर्मली इस अनंत ऊर्जा या शक्ति का प्रतीक मानी जाती है और माना जाता है कि शिव की शक्ति की ऊर्जा में कोई भी दखल नहीं दे सकता। इसलिये गौमुखी को पवित्र माना जाता है और शिव की हमेशा आधी परिक्रमा की जाती है।

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