इस श्रावण में 4 सोमवार, 5 मंगल व 5 बुधवार आएगें

सावन मास का कांवड़ मेला मंगलवार से शुरू होगा। मेले को लेकर व्यापक तैयारियां की गई है। मंगल ग्रह के इस माह कर्क राशि में प्रवेश करने से प्राकृतिक आपदा का भी योग बनेगा। भक्त सब कुछ झेलकर कांवड़ से भोले बाबा को गंगाजल अर्पित करेंगे। घर परिवार व प्रदेश की खुशहाली के लिए मन्नतें मांगेंगे।
 
सावन के फुहारों से हरियाली की छटा निखरती है। हिंदू पंचांग के मुताबिक 23 जुलाई से सावन मास शुरू होगा। भगवान शिव को यह मास अत्यधिक प्रिय है। सावन मास के सोमवार को भगवान शिव के पूजन की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है। शिवालयों में जलाभिषेक के दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र गूंजेगा। भक्त गंगाजल, दूध व दही से अभिषेक कर शिव परिवार की विधि विधान से पूजा अर्चना करेंगे। सावन मास में इस बार चार सोमवार पड़ेगा। पहला सोमवार 29 जुलाई को, दूसरा 5 अगस्त को, तीसरा 12 को तथा चौथा 19 अगस्त को होगा। शिवरात्रि का व्रत 5 अगस्त को होगा। शिवरात्रि पर डाक कांवड़ हरिद्वार से गंगाजल लाकर विभिन्न शिवालयों में चढ़ाएंगे।
 
मंगल ग्रह कर्क राशि में-
 
सावन मास में इस बार 5 मंगलवार व 5 बुधवार आएगा। शिवरात्रि के एक दिन बाद 6 अगस्त को भौमवासरी अमावस्या है। गंगाधाम मंदिर के पंडित व ज्योतिषाचार्य निरंजन पराशर के मुताबिक 18 अगस्त को मंगल ग्रह अपनी नीच कर्क राशि में प्रवेश करेगा। मंगल ग्रह की यह स्थिति निर्मित होने से अतिवृष्टि व प्राकृतिक आपदा का योग निर्मित होगा। सावन में मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत पूजन करने से कन्याओं का विवाह, स्त्रियों को सुख, सौभाग्य व संतान की प्राप्ति होती है। ओम नम: शिवाय (पंचाक्षर) का जाप शुभ माना जाता है।
 
पूजन सामग्री-
 
भोले बाबा का दूध, दही, घी, शहद, जनेऊ, रोली, बेलपत्र, भांग, धतूरा, ओक व प्रसाद से पूजन किया जाता है। पूजन के बाद धूप, दीप व कर्पूर से आरती उतारें। शिवभक्त शिव कथा जरूर सुनें। सवान में शिवलिंग पूजन के साथ नाम जप व शिव पुराण की कथा सुनने व पढ़ने की महिमा है।
 
व्रत त्योहार की सूची
 
तिथि व्रत
 
23 जुलाई आशून्य शयन व्रत व सावन मास शुरू
 
25 जुलाई कजली तीज व गणपति व्रत
 
27 जुलाई नागपंचमी
 
29 जुलाई पहला सोमवार व्रत
 
30 जुलाई मंगला गौरी व्रत
 
02 अगस्त एकादशी व्रत
 
04 अगस्त प्रदोष व्रत
 
05 अगस्त शिवरात्रि व्रत व
 
कांवड़ पूजन
 
06 अगस्त हरियाली अमावस्या
 
09 अगस्त सिंघाड़ा तीज व हरि तालिका व्रत
 
10 अगस्त गणपति दुर्वा व्रत
 
11 अगस्त नागपंचमी (द्वितीय)
 
21 अगस्त रक्षाबंधन
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