जो अमृत पीते हैं उन्हें देव कहते हैं, और जो विष पीते हैं उन्हें देवों के देव "महादेव" कहते हैं


सबसे बड़ा तेरा दरबार है, तू ही सब का पालनहार है सजा दे या माफी महादेव, तू ही हमारी सरकार है....


हम महादेव के दिवाने है, तान के सीना चलते है । ये महादेव का जंगल है, जहाँ शेर करते दंगल है ।


हे महाकाल, मेरे गुनाहों को माफ कर देना क्योंकि, मैं जिस माहौल में रहेता हूँ, उसका नाम है “Duniya”


महाकाल कि महेफिल में बैठा किजिये साहब । बादशाहत का अंदाज खुद ब खुद आ जायेगा ।


हत्यार की जरूरत नहीं पड़ेगी साहब, बस महाकाल बोलती है स्वाह हो जायेगा ~ जय महाकाल


चल रहा हूँ धूप में तो महाकाल तेरी छाया है । शरण है तेरी सच्ची बाकी तो सब मोह माया है ।


लोगो ने कुछ दिया, तो सुनाया भी बहुत कुछ ऐ महादेव एक तेरा ही दर है, जहा कभी ताना नहीं मिला ।


ना पूछो मुझसे मेरी पहचान, मैं तो भस्मधारी हूँ, भस्म से होता जिनका श्रृंगार मैं उस महाकाल का पुजारी हूँ ।


दिखावे की मोहब्बत से दूर रहता हूँ, इसलिये मैं महाकाल के नशे में चूर रहता हूँ ।


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